मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ई-सुश्रुत पहल बनी यूपी की स्वास्थ्य व्यवस्था में डिजिटल क्रांति की वाहक
ई-सुश्रुत ने चिकित्सकीय देखभाल और परामर्श के साथ चिकित्सा शिक्षा को बनाया अधिक सुविधाजनक और भ्रष्टाचार मुक्त
ई-सुश्रुत के जरिये 2.5 करोड़ से अधिक रोगियों के डिजिटल पंजीकरण के साथ उत्तर प्रदेश शीर्ष पर
लखनऊ, 05 दिसंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में वर्ष 2022 से लागू की गई ई-सुश्रुत प्रणाली, डिजिटल क्रांति की वाहक बन चुकी है। ई-सुश्रुत प्रणाली ने प्रदेश की चिकित्सा शिक्षा और रोगियों के देखभाल का डिजिटलीकरण कर आमजन के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को सस्ता और सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय (डीजीएमई) और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कम्प्यूटिंग (सीडैक) के बीच हुए एमओयू के तहत 22 चिकित्सा महाविद्यालयों में अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस), ई-सुश्रुत सॉफ्टवेयर का कार्यान्वयन शुरू हुआ था। वर्तमान में ये प्रणाली पूरी तरह से क्रियान्वित हो रही है जिसका लाभ रोगियों के चिकित्सकीय इलाज और परामर्श के साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा में भी देखने को मिल रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में ई-सुश्रुत प्रणाली का विस्तार बदायूं के जीएमसी से लेकर मिर्जापुर के एएसएनसी समेत प्रदेश के 22 जिलों के चिकित्सा महाविद्यालय में किया जा चुका है। ई,सुश्रुत परियोजना की प्रमुख उपलब्धियों में 2.5 करोड़ से अधिक रोगियों के डिजिटल पंजीकरण के साथ उत्तर प्रदेश शीर्ष पर है। इस बारे में बताते हुए मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज,प्रयागराज के पीआरओ डॉ संतोष सिंह ने बताया कि ई-सुश्रुत की ये डिजिटल प्रणाली, पारंपरिक पंजीकरण की तुलना में कई गुना तेज और सुविधाजनक हैं, रोगियों को लंबी कतारों में घंटों इंतजार नहीं करना पड़ता, साथ ही उनकी केस हिस्ट्री का रिकार्ड ऑनलाइन मौजूद रहने से चिकित्सकों को भी गंभीर मामलों में इलाज करना सुविधाजनक हो गया है।
एचएमआईएस, ई-सुश्रुत प्रणाली के माध्यम से यूपी में अब तक 9 लाख से अधिक रोगियों को भर्ती किया जा चुका है, जो पुराने तरीके से अधिक त्रुटियों से मुक्त है। ओपीडी रोगियों के लिए भी 26 लाख से अधिक ई-प्रिस्क्रिप्शन जारी हो चुके हैं, जबकि 2 लाख से अधिक ई-डिस्चार्ज रिपोर्ट ई-सुश्रुत प्रणाली से तैयार की जा चुकी है। ये चिकित्सकीय रिकॉर्ड, रिपोर्ट, अपॉइंटमेंट, डॉक्टर और टेस्ट की उपलब्धता को एचएमआईएस ई-सुश्रुत मोबाइल ऐप के जरिए स्मार्ट फोन से आसानी से चेक की जा सकती है। इससे न केवल रोगियों को आसानी से गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलना संभव हुआ है साथ ही डॉक्टरों को भी डिजिटल केस हिस्ट्री मिलने से क्लिनिकल निर्णय लेना आसान हो गया है।
राष्ट्रीय स्तर पर यह पहल आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) से जुड़ी हुई है। जिसके तहत यूपी अब तक 1 लाख से अधिक आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अकाउंट (एबीएचए) आईडी बना चुका है। डिजिटल स्कैन और शेयर की सुविधा से अबतक 35 लाख से अधिक ओपीडी टोकन जारी किये जा चुके हैं, जबकि एबीएचए से 11 लाख इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड (ईएचआर) लिंक किये जा चुके हैं। इससे न केवल रोगियों की देखभाल में डॉक्टरों को सुविधा मिलती है, बल्कि केस हिस्ट्री के डिजिटली एक्सेसबिल्टी रोगियों को अधिक गुणवत्तायुक्त चिकित्सकीय परामर्श और इलाज भी उपलब्ध करवाता है।
ई-सुश्रुत परियोजना न केवल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर रही है, बल्कि चिकित्सा शिक्षा को भी डिजिटल रूप दे रही है। युवा डॉक्टर अब डेटा-ड्रिवन दृष्टिकोण अपनाते हैं, जो भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए तैयार कर रहा है। सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में एचएमआईएस से जुड़े पेमेंट गेटवे ने लेनदेन को तेज और नकद रहित बना दिया, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश समाप्त हो गई। ई-सुश्रुत जैसे मॉडल अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगे। उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल प्रधानमंत्री के ‘डिजिटल इंडिया’ के विजन को साकार कर रही है।








Users Today : 0
Users Yesterday : 0